Monday, October 26, 2026
 dipr
Homeराष्ट्रीयउत्तर प्रदेशविनोद शर्मा से कहीं आगे,डी.पी. सिंह की दक्षता से डोईवाला सुगर मिल...
 dipr

विनोद शर्मा से कहीं आगे,डी.पी. सिंह की दक्षता से डोईवाला सुगर मिल ने रचा इतिहास

 

देहरादून ,10 फरवरी 2025 myadmin : डोईवाला चीनी मिल, जब से दिनेश प्रताप सिंह, पीसीएस अधिकारी, ने अधिशासी निदेशक का पदभार संभाला है, तब से लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है।

उनके कुशल प्रबंधन ने मिल की दिशा और दशा दोनों को सुदृढ़ किया है।

Far ahead of Vinod Sharma, Doiwala Sugar Mill created history due to the efficiency of D.P. Singh

मिल के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

श्री सिंह के नेतृत्व में कर्मचारी और अधिकारी अपनी पूरी क्षमता के साथ अनुशासित होकर पेराई कार्यों को संपादित कर रहे हैं।

किसानों को मिल स्तर पर किसी भी समस्या का त्वरित समाधान फोन पर ही किया जा रहा है।

क्षेत्रीय जनता को पेराई सत्र के दौरान गन्ने के वाहनों से लगने वाले जाम की समस्या से भी निजात मिल गई है।

Doiwala Sugar Mill

कभी बंद होने की कगार पर थी मिल:

अधिशासी निदेशक के कार्यभार ग्रहण करने से पहले, मिल के जर्जर होने, मशीनरी पुरानी होने और पेराई कार्य सुचारू रूप से न होने के कारण इसे बूढ़ी और बीमार घोषित कर बंद करने की चर्चा जोरों पर थी।

लेकिन आज उसी मिल में जबरदस्त परिवर्तन देखने को मिल रहा है,

और यह मिल नए-नए कीर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर है।

किसानों का बढ़ा विश्वास:

क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि यह चीनी मिल वर्ष 2021-22 में बंद होने के कगार पर आ गई थी।

इस बीमार और बूढ़ी कही जाने वाली जर्जर चीनी मिल में

दिनेश प्रताप सिंह, पीसीएस, ने 31 अगस्त 2022 को अधिशासी निदेशक का पदभार ग्रहण करने के बाद

जिस योजनाबद्ध तरीके से कार्य करते हुए मिल में कुशल प्रबंधन की मिसाल पेश की है,

उससे हर कोई कायल है।

उन्होंने चीनी मिल को मजबूत स्थिति में लाने का काम किया है।

आंकड़ों में दिखा बदलाव: विनोद शर्मा बनाम डी पी सिंह

यदि आंकड़ों पर विश्वास किया जाये तो 1990 के दशक से वर्ष 2021-22 तक,

क्षेत्रीय किसान तत्कालीन अधिशासी निदेशक विनोद शर्मा को कुशल प्रबंधक मानते थे।

लेकिन आज वही लोग चीनी मिल डोईवाला में स्थापित हो रहे नए-नए कीर्तिमान

और आंकड़ों के आधार पर दिनेश प्रताप सिंह,अधिशासी निदेशक को अब तक का सर्वश्रेष्ठ कुशल प्रशासक मान रहे हैं:

चीनी परता:

पूर्व अधिशासी अधिकारी विनोद शर्मा के कार्यकाल में अधिकतम चीनी परता 9.42% रही,

जबकि डी.पी. सिंह के नेतृत्व में यह बढ़कर 9.90% हो गई है।

यानी, डी.पी. सिंह ने चीनी उत्पादन की दक्षता को काफी बढ़ाया है।

चीनी हानि:

डी.पी. सिंह ने चीनी की हानि को भी कम किया है।

उनके कार्यकाल में यह 2.04% तक आ गई है,

जबकि विनोद शर्मा के समय में यह 2.16% थी।

इससे पता चलता है कि डी.पी. सिंह ने संसाधनों का बेहतर उपयोग किया है।

बंदी:

मिल के बंद रहने का समय भी डी.पी. सिंह के कार्यकाल में बहुत कम हुआ है।

यह 157 घंटे तक सीमित रहा है,

जबकि विनोद शर्मा के समय में यह 402.20 घंटे था।

इससे मिल की उत्पादकता में भारी वृद्धि हुई है।
निष्कर्ष:

उपरोक्त आँकड़ों से स्पष्ट है कि डी.पी. सिंह ने डोईवाला चीनी मिल को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है।

उन्होंने न केवल उत्पादन बढ़ाया है,

बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग करके मिल की कार्यकुशलता में भी सुधार किया है।

उनके कुशल नेतृत्व में मिल लगातार प्रगति कर रही है,

जिससे किसानों और मिल से जुड़े अन्य लोगों को लाभ हो रहा है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
video
play-sharp-fill
video
play-sharp-fill

Most Popular

Recent Comments